संवादसूक्त

कुछ मुख्य संवादसूक्त –  वे सूक्त, जिनमें दो या दो से अधिक देवताओं, ऋषियों या किन्हीं और के मध्य वार्तालाप की शैली में विषय को प्रस्तुत किया गया है, प्राय: …

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सुभाषित-सर्वे गुणाः काञ्चनम् आश्रयन्ते

सुभाषित-सर्वे गुणाः काञ्चनम् आश्रयन्ते  सूक्ति या सुभाषित कुछ शब्दों की वह गागर है ,जो अनेकानेक भावों और अर्थों के सागर को स्वयं में समाहित किये रहती है। वैसे तो शब्दों का अर्थ निश्चित …

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सुभाषित – मेरा भावार्थ

सुभाषित – मेरा भावार्थ  सूक्ति या सुभाषित कुछ शब्दों की वह गागर है ,जो अनेकानेक भावों और अर्थों के सागर को स्वयं में समाहित किये रहती है। वैसे तो शब्दों का अर्थ निश्चित …

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सुभाषित-मेरा भावार्थ

सूक्ति या सुभाषित कुछ शब्दों की वह गागर है ,जो अनेकानेक भावों और अर्थों के सागर को स्वयं में समाहित किये रहती है। वैसे तो शब्दों का अर्थ निश्चित होता …

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प्रातिशाख्य

         प्रातिशाख्य :    ‘प्रति‘ अर्थात्‌ तत्तत्‌ ‘शाखा‘ से संबंध रखनेवाला शास्त्र अथवा अध्ययन। यहाँ ‘शाखा‘ से अभिप्राय वेदों की शाखाओं से है। प्रातिशाख्यों का विषय:  1-वैदिक मंत्रों के शुद्ध उच्चारण, …

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पाठभेद- वैदिक

पाठभेद प्रकृति पाठ विकृति पाठ- अष्टौ विकृतयः 1-संहिता भगवान् 1.जटापाठ व्याडि 2-पदपाठ रावण 2.मालापाठ वशिष्ठ 2.1-पद पाठ कर्ता ऋषि- 3.शिखापाठ भृगु ऋग्वेद शाकल शाखा- शाकल्य ऋषि 4.रेखापाठ अष्टावक्र यजुर्वेद तैत्तरीय …

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वेद-एक परिचय

वेद शब्द सुनते ही  आपके मस्तिष्क में क्या विचार आता है? वेद शब्द सुनते ही  आपके मस्तिष्क में क्या विचार आता है? शायद सबसे पहले विचार आता होगा। कि वेद  हिन्दू …

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